तन्हा लम्हों में तुझे चुनकर,

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तन्हा लम्हों में चुनकर, एक आशियाना बनाने की कोशिश करता हूँ, हार जाता हूँ, हर दफा, जब भी मुस्कुराने की कोशिश करता हूँ!

ऐ मौला।

ऐ मौला मखम् लगा दे, बंदिशों के इस घाव से। की तेरी धूप भारी पर जाए इन अँधेरी छाव पर।

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