तुझे मोहब्बत करना नहीं आता और मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं आता, एक तुझे नहीं आता एक मुझे नहीं आता!
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तेरे हुस्न पे तारीफ भरी किताब लिख देता, काश की तेरी वफा तेरे हुस्न के बराबर होती। तेरे हुस्न का दीवाना कहाँ किसी की होगा। सोचता हूँ, हर कागज पे तेरी तारीफ करूँ, फिर लगता है, कहीं पढ़ने वाला तेरे दीवाना ना हो जाए।
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